छोटा जवाब
कुछ की है, लेकिन ज़्यादातर पुराने गेम थोड़े में बिकते हैं। लोकप्रिय टाइटल बहुत बड़ी तादाद में बने थे, इसलिए स्पोर्ट्स गेम, कंसोल के साथ आए गेम और बड़े बेस्टसेलर आसानी से मिलते हैं और आम तौर पर सस्ते होते हैं। एक बहुत छोटा समूह – जो अक्सर सीमित संख्या में बना या जिसे कलेक्टर ढूँढते हैं – बाकी पूरे ढेर से ज़्यादा का हो सकता है। काम यह है कि सब कुछ एक लॉट में बेचने से पहले उन कुछ गेम को ढूँढ लें।
पहले ढेर छाँटें
रिसर्च से पहले छाँटें। गेम को कंसोल के हिसाब से समूह में बाँटें, जो कार्ट्रिज के लेबल, डिस्क या केस की पीठ पर छपा होता है। फिर हर कंसोल के गेम को पूरेपन के हिसाब से बाँटें:
- लूज़: सिर्फ़ कार्ट्रिज या डिस्क।
- बॉक्स के साथ: गेम और उसका बॉक्स या केस, लेकिन मैनुअल या अंदर के कागज़ के बिना।
- कम्प्लीट इन बॉक्स: गेम, उसका ओरिजिनल बॉक्स या केस, मैनुअल और साथ आए सारे कागज़।
- नया या सील: कभी खुला नहीं, अब भी फ़ैक्ट्री सील में।
हर गेम उसके अपने केस और मैनुअल के साथ रखें। खरीदार गलत बॉक्स में रखी डिस्क तुरंत पकड़ लेते हैं।
गेम को कीमती क्या बनाता है
- प्लेटफ़ॉर्म। कम बिकने वाले या कम समय चलने वाले कंसोल के गेम अक्सर कम छपे, और कुछ सिस्टम के कलेक्टर ज़्यादा सक्रिय हैं।
- प्रिंट रन। छोटे पब्लिशर के गेम, लिमिटेड एडिशन और कम संख्या में बने टाइटल बाद में ढूँढना मुश्किल होता है।
- फ़्रैंचाइज़ की माँग। पुरानी यादों से जुड़े फ़ैन वाली लंबी सीरीज़ लगातार खरीदार खींचती हैं, इसलिए आम कड़ियाँ भी नियमित बिकती हैं।
- कंसोल के आख़िरी दौर के गेम। नया कंसोल आने के बाद निकले गेम अक्सर कम संख्या में बने, क्योंकि ज़्यादातर खिलाड़ी आगे बढ़ चुके थे।
- हालत। फटे लेबल, लिखावट, प्राइस स्टिकर, टूटे केस और खरोंच वाली डिस्क कीमत घटाते हैं।
री-रिलीज़ भी मायने रखती हैं। सस्ते रीप्रिंट, जिन पर अक्सर अलग रंग का लेबल या केस पर बैनर होता है, आम तौर पर उसी गेम के ओरिजिनल प्रिंट से कम के होते हैं। ओरिजिनल मानने से पहले लेबल और केस देख लें।
लूज़ बनाम कम्प्लीट इन बॉक्स
कई पुराने कार्ट्रिज गेम गत्ते के बॉक्स और कागज़ के मैनुअल में आते थे, जो फेंक दिए गए या ख़राब हो गए, इसलिए पूरी कॉपी कार्ट्रिज से ज़्यादा दुर्लभ है। यही वजह है कि वही गेम पूरा होने पर, ख़ासकर अच्छी हालत के बॉक्स के साथ, साफ़ तौर पर ज़्यादा में बिक सकता है। डिस्क के केस बेहतर बचे, फिर भी ओरिजिनल केस, कवर आर्ट और मैनुअल मायने रखते हैं, और बदला हुआ केस कम का होता है।
कीमत देखते समय लूज़ को लूज़ से और कम्प्लीट को कम्प्लीट से मिलाएँ; दोनों को मिलाकर निकला औसत गुमराह करता है। बॉक्स में दबाव, फटन और फीकापन, मैनुअल में गायब पन्ने या लिखावट देखें, और बेचते समय हर कमी बताएँ।
कंसोल और एक्सेसरी
कंसोल की कीमत सिर्फ़ नाम से नहीं, सटीक मॉडल से तय होती है। मॉडल नंबर ढूँढें, जो आम तौर पर नीचे या पीछे के लेबल पर होता है, क्योंकि रिवीज़न और स्पेशल एडिशन अलग दाम पर बिक सकते हैं। फिर जाँचें:
- क्या यह चलता है? चालू करें, कोई गेम चलाएँ, और तस्वीर, आवाज़ और सेव देखें। “टेस्टेड और चालू” आम तौर पर “बिना टेस्ट” से ज़्यादा में बिकता है।
- साथ में क्या है? ओरिजिनल कंट्रोलर, पावर सप्लाई, वीडियो केबल और बॉक्स – सब कीमत बढ़ाते हैं। नोट करें कि कंट्रोलर ऑफ़िशियल हैं या थर्ड-पार्टी।
- हालत। पीला पड़ा प्लास्टिक, गायब बैटरी कवर, चिपचिपे बटन, खिसकते एनालॉग स्टिक और खरोंच वाली हैंडहेल्ड स्क्रीन दाम घटाते हैं।
- मॉडिफ़िकेशन। अगर कंसोल मॉड किया गया, रिपेयर हुआ या पार्ट बदले गए, तो लिस्टिंग में साफ़ बताएँ।
मेमोरी कार्ड, ऑफ़िशियल कंट्रोलर और कम मिलने वाले ऐड-ऑन अलग से भी अच्छे बिक सकते हैं, इसलिए उन्हें अलग जाँचें। कंसोल बेचने की पूरी प्रक्रिया के लिए देखें: गेमिंग कंसोल कैसे बेचें।
रीजनल वर्ज़न, वैरिएंट और नकली कॉपी
कई गेम उत्तर अमेरिका, यूरोप और जापान में अलग-अलग निकले, अलग पैकिंग और कभी-कभी अलग कंटेंट के साथ। रीजन कीमत पर और इस पर असर डालता है कि कौन खरीदेगा, क्योंकि कुछ कंसोल सिर्फ़ अपने रीजन के गेम चलाते हैं। उसी रीजनल वर्ज़न की बिक्री से मिलाएँ। वैरिएंट भी गिने जाते हैं: लेबल डिज़ाइन, पहला प्रिंट बनाम बाद का प्रिंट और लिमिटेड एडिशन के दाम अलग हो सकते हैं।
कीमती टाइटल के लिए रीप्रोडक्शन कार्ट्रिज और कॉपी की हुई डिस्क आम हैं। चेतावनी के संकेत:
- ऐसा लेबल जो धुंधला, बहुत चमकदार, थोड़ा गलत साइज़ का हो या गलत फ़ॉन्ट वाला हो।
- किसी पक्के ओरिजिनल के मुकाबले गलत रंग या टेक्सचर वाला खोल, गलत स्क्रू, या गायब उभरे निशान।
- ऐसी डिस्क जिसका निचला हिस्सा किसी पक्के ओरिजिनल से मेल न खाए। रिकॉर्डेबल डिस्क में अक्सर नीली, हरी या सुनहरी झलक होती है, लेकिन कुछ ओरिजिनल भी रंगीन होते हैं: ओरिजिनल PlayStation डिस्क नीचे से काली होती हैं, और कई PlayStation 2 CD गेम नीले। कुछ नकली भी काली डिस्क पर बनते हैं, इसलिए सिर्फ़ रंग कुछ साबित नहीं करता।
- किसी जाने-माने कीमती गेम के लिए हद से ज़्यादा अच्छा लगने वाला दाम।
अपनी कॉपी को पक्के ओरिजिनल की फ़ोटो से मिलाएँ। कोई एक संकेत यह साबित नहीं करता कि गेम असली है, इसलिए अगर कोई कीमती गेम अब भी शक वाला लगे, तो किसी स्पेशलिस्ट दुकान या अनुभवी कलेक्टर से पूछें। कई कार्ट्रिज सिस्टम में कोई स्पेशलिस्ट खोल खोलकर सर्किट बोर्ड को ओरिजिनल से मिला सकता है, जो बाहर से देखने से ज़्यादा पक्की जाँच है। सील गेम दोबारा सील किए जा सकते हैं, इसलिए ऊँची कीमत वाली सील कॉपी के साथ ख़ास सावधानी रखें।
रीप्रोडक्शन या कॉपी की हुई डिस्क को कभी ओरिजिनल बताकर न बेचें। मार्केटप्लेस अक्सर बिना अनुमति वाली कॉपी की इजाज़त ही नहीं देते, इसलिए लिस्ट करने से पहले नियम देख लें।
देखें कि वही कॉपी असल में कितने में बिकी
माँगी गई कीमत वह है जो बेचने वाला पाना चाहता है, और महँगी लिस्टिंग महीनों बिना बिके पड़ी रह सकती हैं। इसके बजाय पूरी हो चुकी बिक्री देखें: टाइटल, प्लेटफ़ॉर्म और रीजन से खोजें और बिके हुए सामान पर ध्यान दें। दोनों में फ़र्क क्यों होता है, यह हमारी गाइड कितने का बिकेगा? में समझाया गया है।
सटीक कॉपी मिलाएँ: प्लेटफ़ॉर्म, रीजन, प्रिंट और पूरापन। लिस्टिंग की फ़ोटो खोलकर पक्का करें कि साथ में क्या था, बहुत ऊँचे-नीचे दाम हटा दें और देखें कि ज़्यादातर हाल की बिक्री कहाँ इकट्ठा है। प्राइस-ट्रैकिंग साइटें रुझान दिखा सकती हैं, लेकिन किसी भी आँकड़े के पीछे की अलग-अलग बिक्री जाँचें।
एक-एक करके बेचें, लॉट में या ट्रेड-इन करें?
- एक-एक करके: आम तौर पर हर गेम पर सबसे ज़्यादा पैसा, लेकिन हर एक की लिस्टिंग, फ़ीस और कूरियर अलग। असली कीमत वाले गेम के लिए फ़ायदेमंद।
- लॉट में: आम गेम के लिए तेज़ और आसान। लॉट ख़रीदने वाले अक्सर रीसेलर होते हैं जो छूट चाहते हैं, इसलिए कीमती गेम पहले निकाल लें।
- ट्रेड-इन: सबसे तेज़ रास्ता, लेकिन दुकान को मार्जिन चाहिए, इसलिए ऑफ़र आम तौर पर निजी बिक्री से काफ़ी कम होते हैं और कभी-कभी सिर्फ़ स्टोर क्रेडिट।
- लोकल बिक्री, जैसे OLX या Facebook Marketplace पर: न कूरियर, न पैकिंग, लेकिन मिलने का इंतज़ाम आपको करना होता है और खरीदार मोलभाव करते हैं।
चुनने से पहले हिसाब लगाएँ कि फ़ीस और कूरियर के बाद आपके हाथ में क्या आएगा। सस्ते गेम पर बेचने का खर्च दाम का बड़ा हिस्सा खा सकता है, ऐसे में लॉट या ट्रेड-इन समझदारी है। यह भी देखें: क्या पुराना इलेक्ट्रॉनिक्स, कैमरे और गेम बेचना फ़ायदेमंद है?
WorthAI कहाँ काम आता है
WorthAI फ़ोटो से गेम, कंसोल या एक्सेसरी पहचानता है, कीमत की अनुमानित रेंज देता है और उसके पीछे की मार्केटप्लेस लिस्टिंग दिखाता है, ताकि आप सबूत खुद जाँच सकें। ढेर को जल्दी छाँटने और ध्यान देने लायक चीज़ें पकड़ने का यह तेज़ तरीका है। अगर पहचान गलत हो, तो “सुधारें” पर टैप करें। फ़ोटो से रीजन, प्रिंट, अंदर का मैनुअल या कार्ट्रिज असली है या नहीं, यह पक्का नहीं हो सकता – WorthAI असलीपन साबित नहीं करता – इसलिए ख़रीदने, बेचने या दाम रखने से पहले ये बातें खुद पक्की करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
कैसे पता करें कि मेरे पुराने वीडियो गेम की कोई कीमत है?
उन्हें कंसोल और पूरेपन के हिसाब से छाँटें, फिर उसी टाइटल, प्लेटफ़ॉर्म, रीजन और पूरेपन की हाल की बिक्री कीमतें देखें। कम छपे, कलेक्टरों की तेज़ माँग वाले या पूरी ओरिजिनल पैकिंग वाले गेम सबसे ज़्यादा अलग दिखते हैं।
क्या लूज़ कार्ट्रिज पूरे गेम से कम कीमत के होते हैं?
आम तौर पर हाँ। ओरिजिनल बॉक्स और मैनुअल अक्सर फेंक दिए गए, इसलिए पूरी कॉपी ज़्यादा दुर्लभ है। लूज़ बिक्री को लूज़ से और कम्प्लीट को कम्प्लीट से मिलाएँ।
क्या पुराने गेम बंडल में बेचने चाहिए?
आम गेम के लिए बंडल तेज़ है, लेकिन खरीदार आम तौर पर छूट चाहते हैं। पहले हर गेम जाँचें, कीमती गेम अलग बेचें और बाकी को बंडल करें।