छोटा जवाब
ज़्यादातर पुराने कैमरे कम कीमत के होते हैं। घरों की दराज़ों में पड़े साधारण कॉम्पैक्ट और स्नैपशॉट कैमरे बहुत बड़ी तादाद में बने थे और अक्सर थोड़े में बिकते हैं, या बिकते ही नहीं। एक छोटा समूह अच्छी कीमत का होता है: अच्छी तरह बने फ़िल्म SLR, रेंजफ़ाइंडर, मीडियम फ़ॉर्मैट कैमरे, कुछ प्रीमियम कॉम्पैक्ट और कई अच्छे लेंस। आपके पास कौन-सा है, यह जानने के लिए सटीक मॉडल पहचानें, देखें कि वह चलता है या नहीं, और हाल की बिक्री मिलाएँ।
सटीक ब्रांड और मॉडल ढूँढें
तीन जगह देखें:
- टॉप प्लेट और आगे का हिस्सा: ब्रांड और मॉडल का नाम अक्सर ऊपर, या आगे लेंस के पास, खुदा या छपा होता है।
- लेंस पर लिखावट: आगे के काँच के चारों ओर की रिंग या लेंस बैरल पर आम तौर पर बनाने वाला, मिलीमीटर में फ़ोकल लेंथ और सबसे बड़ा अपर्चर लिखा होता है, जैसे 1:2 या f/2.8।
- सीरियल नंबर: बॉडी का नंबर आम तौर पर टॉप प्लेट, पीछे या नीचे होता है, और लेंस का अपना नंबर होता है। कुछ कंपनियों के कैमरों में सीरियल नंबर से कैमरे का समय भी पता चलता है।
बॉडी और लेंस को दो अलग चीज़ों की तरह लिखें, और नोट करें कि कौन-सा लेंस किस कैमरे पर लगा था, क्योंकि माउंट तय करता है कि वह किन बॉडी पर फ़िट होगा। नाम, लेंस की लिखावट और सीरियल नंबर की साफ़ फ़ोटो लें।
कौन-से कैमरे आम तौर पर मायने रखते हैं
आम तौर पर ध्यान से जाँचने लायक
- SLR, जिनके लेंस बदले जा सकते हैं, ख़ासकर जानी-मानी कैमरा कंपनियों के ऊँचे मॉडल।
- रेंजफ़ाइंडर, जिनमें फ़ोकस लेंस से देखकर नहीं, बल्कि व्यूफ़ाइंडर में एक छोटे चमकीले हिस्से को मिलाकर किया जाता है।
- मीडियम फ़ॉर्मैट कैमरे, जिनमें 35mm से चौड़ी रोल फ़िल्म लगती है, जैसे ट्विन-लेंस रिफ़्लेक्स मॉडल, कई फ़ोल्डिंग कैमरे और बड़े सिस्टम कैमरे।
- प्रीमियम कॉम्पैक्ट, जिनमें तेज़ और शार्प फ़िक्स्ड लेंस होता है। कुछ के बड़े चाहने वाले हैं, इसलिए छोटा होने से किसी कैमरे को खारिज न करें।
आम तौर पर कम कीमत के
- साधारण फ़िक्स्ड लेंस वाले प्लास्टिक पॉइंट-एंड-शूट कैमरे।
- डिस्पोज़ेबल कैमरे और ज़्यादातर 110 और APS कैमरे।
- कई शुरुआती आम डिजिटल कैमरे, हालाँकि कुछ कॉम्पैक्ट मॉडल फिर से लोकप्रिय हुए हैं, इसलिए खारिज करने से पहले उस मॉडल को देख लें।
ये रुझान हैं, नियम नहीं। किसी मॉडल की माँग बदलती रहती है, इसलिए नाम के बजाय हाल की बिक्री देखें।
मशहूर नाम सबूत नहीं है
टॉप प्लेट पर खुदा कलेक्टिबल ब्रांड यह साबित नहीं करता कि कैमरा असली है। नकल और दोबारा खोदे गए कैमरे मौजूद हैं, जिनमें सबसे मशहूर वे सोवियत रेंजफ़ाइंडर हैं जिन्हें Leica जैसा दिखाने के लिए बदला गया। अगर कोई कैमरा दुर्लभ या कीमती लगे, तो जाँचें कि उसकी बारीकियाँ और सीरियल नंबर असली मॉडल से मेल खाते हैं, और लिखावट पर भरोसा करने या ऊँचा दाम रखने से पहले किसी स्पेशलिस्ट कैमरा डीलर या रिपेयर करने वाले की राय लें।
लेंस की कीमत बॉडी जितनी हो सकती है
लेंस बदलने वाले कैमरों में कीमत का बड़ा हिस्सा, कभी-कभी ज़्यादा हिस्सा, लेंस का होता है। तेज़ लेंस (कम f-नंबर, जैसे f/1.4 या f/2), अनोखी फ़ोकल लेंथ और किसी ख़ास लुक के लिए जाने जाने वाले लेंस अक्सर माँग में रहते हैं, कुछ इसलिए भी कि कई लेंस एडैप्टर से आज के मिररलेस कैमरों पर लग जाते हैं। आम किट लेंस से शायद ही कुछ जुड़ता है। लेंस को अलग चीज़ मानें।
बिना फ़िल्म के तुरंत जाँच
फ़िल्म डाले बिना पीछे का ढक्कन खोलें, और शटर के पर्दों या काँच को न छुएँ:
- शटर: वाइंड करें, अलग-अलग स्पीड पर शटर दबाएँ और शटर खुलते देखें। 1 सेकंड जैसी धीमी स्पीड तेज़ स्पीड से साफ़ लंबी सुनाई देनी चाहिए, और B सेटिंग के अलावा शटर हर बार बंद होना चाहिए। कई इलेक्ट्रॉनिक कैमरे बिना चालू बैटरी के शटर नहीं चलाते, और कुछ ऑटोमैटिक कैमरे पीछे का ढक्कन खुला होने पर अलग बर्ताव करते हैं, इसलिए शटर न चलने का मतलब हमेशा ख़राबी नहीं है।
- अपर्चर: SLR लेंस पर सबसे छोटा अपर्चर (सबसे बड़ा नंबर) सेट करें और शटर दबाते हुए लेंस के आगे से देखें। ब्लेड झट से बंद होकर फिर खुलने चाहिए। रेंजफ़ाइंडर और मैनुअल अपर्चर रिंग वाले कैमरों में रिंग घुमाने पर ब्लेड हिलते हैं। ब्लेड पर तेल या धीमी, अटकती चाल ख़राबी है।
- मीटर: सही प्रकार की नई बैटरी लगाएँ, फिर कैमरा किसी रोशन खिड़की और किसी अँधेरे कोने की ओर करें। सुई या डिस्प्ले बदलना चाहिए। कुछ पुराने कैमरे मरकरी बैटरी के लिए बने थे जो दशकों से नहीं बिकतीं, और उनके विकल्प अलग रीडिंग दे सकते हैं, इसलिए देखें कि मॉडल को क्या चाहिए। कुछ में सेलेनियम मीटर होता है जिसे बैटरी नहीं चाहिए, पर वह उम्र के साथ अक्सर कमज़ोर हो जाता है।
- लाइट सील: पीछे के ढक्कन के चारों ओर फ़ोम की पट्टियाँ और SLR में वह छोटा पैड देखें जिससे मिरर टकराता है। चिपचिपा, भुरभुरा या गायब फ़ोम मतलब सील बदलनी होंगी।
- धुंध और फ़ंगस: एक छोटी टॉर्च लेंस के आर-पार चमकाएँ और दूसरी तरफ़ से देखें। धुंध दूधिया कोहरे जैसी दिखती है; फ़ंगस धागों या शाखाओं वाले जाले जैसा। अंदर थोड़ी धूल आम है और बहुत कम मायने रखती है।
व्यूफ़ाइंडर, फ़िल्म एडवांस और बैटरी खाने में जंग भी देखें। बेचने से पहले अटके शटर में तेल न डालें और साफ़ करने के लिए लेंस न खोलें; यह रिपेयर करने वाले का काम है, और कोशिश से हालत बिगड़ सकती है। हर स्पीड पर शटर चलना यह साबित नहीं करता कि स्पीड सही हैं, और सिर्फ़ एक टेस्ट रोल ही साबित करता है कि कैमरा अच्छी फ़ोटो लेता है, इसलिए अपनी जाँच को ठीक वैसा ही बताएँ जैसी वह थी।
हालत ईमानदारी से बताएँ
- टेस्टेड: बताएँ कि आपने क्या और कैसे जाँचा, जैसे शटर हर स्पीड पर चलता है, मीटर प्रतिक्रिया देता है और टॉर्च में लेंस साफ़ है। अगर टेस्ट रोल चलाया, तो वह भी लिखें।
- बिना टेस्ट: तभी लिखें जब आपको सच में पता न हो, और डिस्क्रिप्शन में साफ़ लिखें। खरीदार मानते हैं कि बिना टेस्ट वाला कैमरा शायद न चले, और उसी हिसाब से दाम लगाते हैं। “यूज़्ड” आम तौर पर पूरी तरह चालू चीज़ के लिए समझा जाता है, इसलिए जो कैमरा आप जाँच नहीं पाए, उसके लिए “पार्ट्स के लिए या ख़राब” लिखना ज़्यादा ठीक है।
- पार्ट्स के लिए या ख़राब: तब इस्तेमाल करें जब आपको कोई ऐसी ख़राबी पता हो जो कैमरे को ठीक से चलने से रोकती है, जैसे जाम शटर या बंद मीटर, और ख़राबी का नाम लिखें।
जो भी हालत चुनें, धुंध, फ़ंगस, दबे निशान और लेंस के निशान बताएँ और साफ़ फ़ोटो में दिखाएँ। पता होते हुए किसी कैमरे को बिना टेस्ट बताना रिटर्न और झगड़े की वजह बन सकता है।
केस, बॉक्स, मैनुअल और फ़्लैश
- ओरिजिनल बॉक्स और मैनुअल: कुछ जोड़ सकते हैं, मुख्य रूप से बहुत अच्छी हालत वाले कलेक्टिबल मॉडल के लिए। रोज़मर्रा के कैमरे में इनसे बहुत कम जुड़ता है।
- लेदर केस: कई कैमरों के साथ बिके फ़िटेड केस आम हैं और कम जोड़ते हैं।
- फ़्लैश: उसी कैमरा सिस्टम के लिए बना फ़्लैश अलग से लिस्ट करने लायक हो सकता है। आम फ़्लैश से आम तौर पर कम जुड़ता है।
- कैप, हुड और स्ट्रैप: आगे और पीछे के लेंस कैप लिस्टिंग को पूरा दिखाते हैं। मैचिंग हुड या ओरिजिनल स्ट्रैप थोड़ी मदद करते हैं; पुराने फ़िल्टर शायद ही।
- अतिरिक्त लेंस: साथ बेचने का फ़ैसला करने से पहले हर एक की अलग रिसर्च करें।
बिक्री कीमतें मिलाएँ, बॉडी और लेंस अलग-अलग
देखें कि खरीदारों ने उसी मॉडल के लिए असल में कितना दिया, न कि बेचने वाले क्या माँग रहे हैं। यह फ़र्क हमारी गाइड कितने का बिकेगा? में समझाया गया है। कैमरों के लिए तीन बार खोजें:
- सिर्फ़ बॉडी, जो अक्सर “body only” लिखकर बिकती है।
- सिर्फ़ लेंस, बनाने वाले, फ़ोकल लेंथ, अपर्चर और माउंट से।
- बॉडी और लेंस साथ में।
मॉडल के साथ हालत भी मिलाएँ: टेस्टेड, चालू कैमरे और बिना टेस्ट या पार्ट्स वाले कैमरे अलग ढेर हैं। फिर अलग-अलग बेचने और किट में बेचने के असल कुल को मिलाएँ। अलग बेचने का मतलब है हर बिक्री पर फ़ीस और, अगर आप भरते हैं, कूरियर का खर्च; हाथ में आने वाली रकम का हिसाब लगाएँ। बेचने के पूरे स्टेप के लिए देखें: कैमरा कैसे बेचें।
WorthAI कहाँ काम आता है
WorthAI फ़ोटो से कैमरा पहचानता है, कीमत की अनुमानित रेंज देता है और उस अनुमान के पीछे की मार्केटप्लेस लिस्टिंग दिखाता है, ताकि आप जाँच सकें कि वे आपके मॉडल और हालत से मेल खाती हैं। हर एक की रिसर्च के लिए बॉडी और लेंस की अलग-अलग फ़ोटो लें, और अगर पहचान गलत हो, तो “सुधारें” पर टैप करें। WorthAI शटर टेस्ट नहीं कर सकता, लेंस के अंदर नहीं देख सकता और यह पक्का नहीं कर सकता कि कैमरा असली है, इसलिए ऊपर की जाँचें आपको ही करनी हैं। नतीजा पक्का करें, फिर अपना दाम चुनें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या पुराने फ़िल्म कैमरों की कोई कीमत है?
कुछ की है। बड़ी तादाद में बने कई कॉम्पैक्ट कम में बिकते हैं, जबकि अच्छी तरह बने SLR, रेंजफ़ाइंडर, मीडियम फ़ॉर्मैट कैमरे, कुछ प्रीमियम कॉम्पैक्ट और अच्छे लेंस ज़्यादा के हो सकते हैं। उसी मॉडल की उसी हालत में हाल की बिक्री देखें।
बिना फ़िल्म के कैसे पता करें कि पुराना कैमरा चलता है?
पीछे का ढक्कन खोलें, अलग-अलग स्पीड पर शटर चलाएँ, अपर्चर ब्लेड देखें, सही प्रकार की नई बैटरी से मीटर जाँचें और टॉर्च से लेंस देखें। इन जाँचों से साफ़ ख़राबियाँ दिखती हैं, लेकिन पूरी तरह चालू होने का पक्का सबूत सिर्फ़ टेस्ट रोल देता है।
कैमरा बॉडी और लेंस साथ बेचूँ या अलग?
सिर्फ़ बॉडी, सिर्फ़ लेंस और दोनों साथ की बिक्री कीमतें मिलाएँ। फ़ीस और कूरियर के बाद जिससे बेहतर कुल मिले, वही चुनें। फ़िक्स्ड लेंस वाले कैमरे एक ही चीज़ के रूप में बिकते हैं।